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चौदह वर्ष की उम्र में उसने लोहार की कार्यशाला छोड़ दी। छब्बीस वर्ष की उम्र में वह लौट आया। और पीढ़ियों से चली आ रही एक पारिवारिक परंपरा अप्रत्याशित ढंग से आगे बढ़ने लगी।
वह लड़का जिसने कार्यशाला छोड़ दी
चौदह वर्ष की उम्र में मैनुएल हाएन (Manuel Jaén) ने अपना गाँव छोड़ दिया।
स्पेन के पश्चिमी हिस्से में, सलामांका प्रांत का एक छोटा-सा गाँव है—सान्तिबान्येस दे बेहार (Santibáñez de Béjar)। मैनुएल का परिवार कई पीढ़ियों से वहाँ लोहे का काम करता आया है।
उनकी कार्यशाला में एक विशेष प्रकार का तराजू बनाया जाता है, जिसे स्पेन में romana कहा जाता है। यह एक ऐसा तराजू है जो बाट, उत्तोलक और गुरुत्वाकर्षण के सहारे वजन मापता है। इसे न बिजली की ज़रूरत होती है, न किसी स्क्रीन की।
मैनुएल के जन्म से बहुत पहले से उनके परिवार के लोग इसी कार्यशाला में लोहा तपाते और हथौड़े से उसे आकार देते आए थे। यह हुनर उनके परदादा पास्कुआल (Pascual) से भी कम-से-कम एक पीढ़ी पहले का है। फिर इसे उनके दादा मैनुएल, पिता गाब्रिएल (Gabriel) और चाचा राफाएल (Rafael) ने आगे बढ़ाया।

बाएँ: मैनुएल के चाचा, Rafael Jaén Jiménez। दाएँ: उनके पिता, Gabriel Jaén Jiménez।
कई वर्ष बाद मैनुएल ने अपने बचपन के बारे में कहा कि वह “un niño de fragua” — यानी “भट्ठी में पला-बढ़ा बच्चा” था।
आग, लोहा और हथौड़े की आवाज़ उसके बचपन का हिस्सा थे। उस उम्र में वह इन्हें किसी परंपरा के रूप में नहीं देखता था। ये बस उसके आसपास की दुनिया थी।
उसके पिता गाब्रिएल के लिए इस काम का अर्थ और भी व्यावहारिक था। कठिन समय में वे अपने हाथों से बनाए romana तराजू लेकर गाँव-गाँव जाते और उन्हें बेचते थे। हर तराजू केवल पारिवारिक हुनर का प्रतीक नहीं था। वह परिवार की आजीविका का साधन भी था।
लेकिन मैनुएल के माता-पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा केवल इसलिए वही जीवन जिए क्योंकि वह इसी परिवार में पैदा हुआ है।
वे उससे अक्सर कहते थे:
“कार्यशाला तो पहले से ही तुम्हारी है।”
कार्यशाला एक ऐसा रास्ता थी जिसे वह कभी भी चुन सकता था। लेकिन उस रास्ते पर चलना उसके लिए अनिवार्य नहीं था।
उसके माता-पिता चाहते थे कि वह “दूसरी आकाशगंगाओं” को भी देखे और अपना रास्ता स्वयं चुने। उसकी दो बड़ी बहनें, लेओनोर (Leonor) और मारिया हेसूस (María Jesús), भी गाँव से बाहर अपने-अपने रास्ते पर आगे बढ़ चुकी थीं। एक नर्स बनी और दूसरी जीवविज्ञानी।
इस तरह चौदह वर्ष की उम्र में मैनुएल ने कार्यशाला छोड़ दी।
हम अक्सर जीवन में किसी मोड़ का असली महत्व बहुत आगे निकल जाने के बाद ही समझ पाते हैं।
रॉबर्ट फ़्रॉस्ट (Robert Frost) की कविता The Road Not Taken में एक व्यक्ति दो रास्तों के सामने खड़ा है।
“Two roads diverged in a yellow wood.”
शुरुआत में दोनों रास्ते बहुत अलग नहीं दिखते। जीवन के निर्णायक मोड़ भी कभी-कभी ऐसे ही होते हैं।
जब मैनुएल ने अपना गाँव छोड़ा, तो शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी कि कार्यशाला से दूर ले जाने वाला रास्ता एक दिन उसे वहीं वापस ले आएगा।

उसे स्वयं भी यह नहीं पता था।
मैनुएल ने औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स और फिर कंप्यूटर विज्ञान की पढ़ाई की। उसने स्पेन की दूरसंचार कंपनी टेलीफ़ोनिका (Telefónica) में प्रशिक्षण लिया और वहाँ नौकरी करने की संभावना को ध्यान में रखकर तैयारी की।
जिस दुनिया को वह पीछे छोड़ आया था, वह लोहे, आग और हथौड़ों की दुनिया थी। उसके सामने खुल रही नई दुनिया इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटरों की थी।
पहली दुनिया को उसका परिवार कई पीढ़ियों से जानता था। दूसरी दुनिया तेजी से सामने आ रहे भविष्य की थी।
ऐसा लग रहा था कि उसका जीवन दूसरी दुनिया की ओर बढ़ रहा है।
वह युवक जो लौट आया
फिर दो घटनाएँ हुईं।
टेलीफ़ोनिका के निजीकरण ने उस पेशेवर रास्ते को बदल दिया जिसके लिए मैनुएल तैयारी कर रहा था। उधर गाँव में उसके पिता गाब्रिएल सेवानिवृत्त हो चुके थे। परिवार में कार्यशाला का काम जारी रखने वाले आखिरी सदस्य, उसके चाचा राफाएल, भी सेवानिवृत्ति की तैयारी कर रहे थे।
मैनुएल कार्यशाला में लौट आया। उसकी उम्र छब्बीस वर्ष थी।
जगह वही थी। लेकिन जो व्यक्ति वहाँ से गया था और जो लौटकर आया, वे अब पूरी तरह एक जैसे नहीं थे।
उसके निर्णय ने आसपास के लोगों को चौंका दिया। पढ़ाई पूरी करके एक अलग पेशे की तैयारी करने वाला युवक अब एक छोटे-से गाँव की कार्यशाला में romana तराजू बनाने जा रहा था।
फिर भी उसके परिवार ने उसे रोका नहीं। उन्होंने उसे अपना रास्ता बनाने में मदद की।
कई दशक बाद मैनुएल ने उस क्षण को कुछ अलग शब्दों में याद किया:
“मैं वापस नहीं लौटा था। मैंने एक नया रास्ता खोला था।”
ये आज के मैनुएल के शब्द हैं, जो बीते समय को पीछे मुड़कर देख रहा है। उस समय का युवा मैनुएल नहीं जानता था कि यह रास्ता उसे कहाँ ले जाएगा।
जब TENVER ने उससे पूछा कि उस समय उसके मन में क्या चल रहा था, तो उसने उत्तर दिया:
“मैं कुछ नहीं सोच रहा था। बस किसी तरह हर दिन गुज़ार रहा था।”
वह रास्ता आसान नहीं था। उसने अपनी गलतियों से सीखा और जो कुछ कमाया, उसे फिर से अपने काम में लगा दिया।

पास्कुआल हाएन (Pascual Jaén) और पाउला ब्रिस (Paula Briz) अपने बच्चों के साथ, लगभग 1920 के दशक में। उनके सभी बच्चों ने romana तराजू बनाना सीखा था।
पढ़ाई के दौरान मैनुएल ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर विज्ञान का ज्ञान हासिल किया था। उसने तकनीकी चित्र बनाना और काम को अधिक व्यवस्थित ढंग से संगठित करना भी सीखा था।
धीरे-धीरे वह यह ज्ञान कार्यशाला में लाने लगा।
Romana के जिन हिस्सों को पीढ़ियों से अनुभव के आधार पर बनाया जाता रहा था, उनके चित्र अब एक-एक करके ग्राफ़ पेपर पर बनने लगे।
पीढ़ियों के अनुभवी हाथों में सुरक्षित माप और आकार अब कागज़ पर रेखाओं और संख्याओं में बदलने लगे थे।
हम नहीं जानते कि मैनुएल के माता-पिता ने अपने बेटे के लिए इसी भविष्य की कल्पना की थी या नहीं। लेकिन जिस ज्ञान ने कभी उसे कार्यशाला से बाहर निकाला था, वही ज्ञान अब उसके साथ कार्यशाला में प्रवेश कर रहा था।
पुरानी बेकरियों में पिछले दिन के आटे का थोड़ा-सा हिस्सा बचाकर रखा जाता है और उसे नए आटे में मिलाया जाता है।
यही खमीर का आधार है।
इसका उद्देश्य कल की रोटी फिर से बनाना नहीं, बल्कि नए आटे में खमीर उठाकर आज की रोटी तैयार करना है।
शायद किसी परंपरा का आगे बढ़ना भी कुछ ऐसा ही होता है। अतीत को हूबहू दोहराने के बजाय उसके एक हिस्से को वर्तमान की चीज़ों के साथ मिलाया जाता है।
इससे जो बनता है, वह न तो कल की चीज़ होती है और न ही पूरी तरह नई।
वह आज की चीज़ बन जाती है।
उसके साथ क्या लौटकर आया
मैनुएल आज भी romana तराजू बनाता है। वह लोहा काटता है, उसे गर्म करता है और हथौड़े से आकार देता है। वह उसके हिस्सों को जोड़ता है और तराजू का संतुलन ठीक करता है।
इसका मूल सिद्धांत वही पुराना है। इसमें कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कोई आवश्यकता नहीं होती।
वह इसे “शुद्ध भौतिकी” कहता है।

लेकिन मैनुएल के लिए तराजू का संतुलन केवल भौतिकी का विषय नहीं है। जब वह romana के बारे में बात करता है, तो निष्पक्षता, ईमानदारी, न्यायसंगत व्यवहार और तटस्थता जैसे शब्द सामने आते हैं।
“इस जीवन में जिस किसी चीज़ का भी वजन है, उसे romana के निर्णय से गुज़रना पड़ता है।”
इतने वर्षों तक तराजू बनाते-बनाते मैनुएल के लिए वह केवल वजन मापने का उपकरण नहीं रह गया।
डिजिटल तराजुओं से भरी दुनिया में भी कुछ लोग आज romana की तलाश करते हैं। कुछ नया तराजू बनवाने आते हैं। कुछ अपना पुराना तराजू लेकर मैनुएल की कार्यशाला में लौटते हैं।
मैनुएल पुराने तराजू को अपने काम की मेज़ पर रखता है। वह उसके हिस्से अलग करता है, जंग और गंदगी साफ़ करता है, खराब हिस्सों की मरम्मत करता है और उसे फिर से जोड़ता है। आवश्यकता पड़ने पर वह उपयुक्त पुराने पुर्ज़े ढूँढ़ता है और उसका संतुलन दोबारा ठीक करता है, ताकि तराजू फिर से वजन माप सके।
काम पूरा होने पर वह पुराना तराजू उसके मालिक को लौटा देता है।
उसे आज भी उनके चेहरों के भाव देखना अच्छा लगता है।
यदि मैनुएल नहीं लौटा होता, तो romana का क्या हुआ होता?
संभवतः romana नाम का यह उपकरण दुनिया से पूरी तरह गायब नहीं होता। पुराने तराजू संग्रहालयों, घरों और गोदामों में बचे रहते।
लेकिन किसी वस्तु का बचा रहना और उसे बनाने का हुनर जानने वाले व्यक्ति का बने रहना एक ही बात नहीं है।
कौन-सा लोहा चुनना है। उसे कितना गर्म करना है। हथौड़ा कहाँ मारना है। सही संतुलन कैसे प्राप्त करना है। कुछ ठीक से काम न करे तो सबसे पहले क्या जाँचना है।
यह ज्ञान हमेशा लिखित रूप में दर्ज नहीं होता। कुछ बातें केवल किसी पुस्तिका को पढ़कर दोबारा नहीं सीखी जा सकतीं।
क्योंकि कभी-कभी ज्ञान किताबों में नहीं, लोगों के भीतर सुरक्षित रहता है।
मैनुएल के बाद की राह
मैनुएल की दो बेटियाँ हैं, नेरेआ (Nerea) और वालेरिया (Valeria)।
उनकी कहानियाँ अभी लिखी जानी बाकी हैं।
मैनुएल चाहता है कि उसकी बेटियाँ अपना रास्ता स्वयं चुनें और वही करें जो वे करना चाहती हैं। वह और उसकी पत्नी मेर्चे (Merche) इस यात्रा में उनकी सहायता करेंगे।
हम नहीं जानते कि उनके रास्ते कभी कार्यशाला तक पहुँचेंगे या नहीं। मैनुएल स्वयं भी चौदह वर्ष की उम्र में वहाँ से जाते समय नहीं जानता था कि वह कभी लौटेगा।
बहुत पहले उसके माता-पिता ने उससे कहा था:
“कार्यशाला तो पहले से ही तुम्हारी है।”
एक पीढ़ी पहले इन्हीं शब्दों ने एक लड़के को कार्यशाला से बाहर की दुनिया में भेजा था।
अभी कोई नहीं जानता कि यही शब्द अगली पीढ़ी को कहाँ ले जाएँगे।

TENVER VIEW
लोहार की कार्यशाला और कंप्यूटर विज्ञान। दो ऐसी दुनियाएँ जिन्हें हम शायद ही एक ही कहानी में देखने की उम्मीद करें। लेकिन मैनुएल के जीवन में ये दोनों एक-दूसरे से मिलीं।
उनके मिलन से कुछ ऐसा पैदा हुआ जो पहले अस्तित्व में नहीं था।
आज हम एक और बड़े परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से हमारे काम करने, सीखने और सृजन करने के तरीकों को बदल रही है।
दुनिया जितनी तेज़ी से बदलती है, वर्षों में संचित अनुभव और नई तकनीक के बीच की दूरी उतनी ही अधिक महसूस हो सकती है। जो कल तक आवश्यक लगता था, वह आज पुराना दिखाई दे सकता है और किसी समय पूरी तरह गायब भी हो सकता है।
ऐसे समय में हम पुरानी और नई चीज़ों को एक-दूसरे के विरोध में रखकर देखने लगते हैं।
लेकिन मैनुएल का रास्ता हमें दिखाता है कि दोनों का एक-दूसरे के विरोध में होना आवश्यक नहीं है। और वह हमारे सामने एक प्रश्न छोड़ जाता है।
हमारे समय का खमीर का आधार क्या है?



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